Creative Corner
A living gallery of frames and verses.
"From pieces to a masterpiece."
Photography
Poetry
जुदाई के कुछ महीनों बाद एक दिन मुझसे, वो मोड़ पर टकरा गया एक बार तो दिल को झटका का सा लगा कहीं ये लौट कर तो नहीं आ गया। मैंने सोचा कि यह, बस एक इत्तेफ़ाक है पर इस मुलाकात के पीछे, शायद उसका ही दिमाग है मेरे देखते ही उसे वो नज़र यूं चुरा गया, इक बार फिर दिल को झटका सा लगा, कहीं ये लौट कर तो नहीं आ गया। वो नज़रों का ठहरना, यूँ खामोशी में एक बात छुपाना, आँखों में दर्द लिए, फिर से वही किस्सा दोहराना। उसने पूछा मुझसे कि मेरी जिंदगी में क्या कोई और है आ गया ? इस बार फिर दिल को झटका सा लगा कहीं ये लौट कर तो नहीं आ गया। मैंने कहा कि इन सब बातों का क्या फ़ायदा अब ये सब बातें बे सर-पैर हैं अब हम दो ऐसे अजनबी जो एक दूसरे के लिए गैर हैं सुनकर ये वो मुस्कुराया, जैसे मुझसे से कुछ छुपा गया इस बार फिर दिल को झटका सा लगा कहीं ये लौट कर तो नहीं आ गया। वो बातें अधूरी, वो रातें बेचैन, सब यादों में उलझा सा है, एक अजनबी चेहरा मेरे, दिल में कहीं सुलगा सा है। लफ़्ज़ों में कैद करूँ उसे, या भूलकर आगे बढ़ जाऊँ, पर वो पल जो याद आयें उनको कैसे मैं भुलाऊँ| सोचा था गए तो गए, बात पुरानी हो गई, पर उसकी इक झलक देखते ही, ज़िदा पुरानी कहानी हो गई। हाथ में गुलाब लिए, फिर वही शायरियाँ वो सुनाने लगा, जिन वादों में कभी दम था, वही बातें फ़िर बनाने लगा। मैं मुस्कुराई, सोचा थोड़ा उसे और तड़पने दूँ, बातों ही बातों में बिन कुछ कहे उसे और तरसने दूँ। अब दिल वो कमज़ोर नहीं, जो हर बात पे पिघल जाए, और ये भी तय है कि उसकी तरफ़ खुद को ना मुड़ने दूँ। उसका हर इशारा मैं बस हँस के टाल देती, जो कभी आरज़ू थी मेरी, अब उसे सवाल कह के निकाल देती। वो लौट आया था सोचकर कि शायद प्यार फिर जागेगा, पर इस बार वो भरोसा ना दिला पाया की ये इश्क़ अब नहीं भागेगा।